Kahani Ka Jadu Blog विक्रम बेताल की कहानी: मगरमच्छ की चालाकी

विक्रम बेताल की कहानी: मगरमच्छ की चालाकी

मगरमच्छ की चालाकी

एक समय की बात है, विक्रमादित्य और बेताल की कथाओं में एक कथा आती है जिसका नाम है “मगरमच्छ की चालाकी”। इस कथा में विक्रमादित्य को एक चालाक मगरमच्छ का सामना करना पड़ता है।

एक दिन, विक्रमादित्य जंगल में घूम रहे थे। वह एक नदी के किनारे पहुंचा, जहां एक मगरमच्छ धीरे-धीरे पानी में बह रहा था। मगरमच्छ विक्रमादित्य को देखकर चुपचाप रहा और अपने प्राणों को बचाने के लिए ध्यान से काम ले रहा था।

विक्रमादित्य को रोमांचित करने के लिए और उसकी चालाकी को देखने के लिए बेताल ने विक्रमादित्य को उसे पूछने के लिए कहा, “विक्रम, तू क्या सोचता है, यह मगरमच्छ क्या कर रहा है?”

विक्रमादित्य ने ध्यान से मगरमच्छ को देखा और कहा, “यह बहुत चालाक है। वह धीरे-धीरे पानी में बह रहा है ताकि कोई उसे न देख सके। यह उसकी स्वर्णिम आँखों को छिपाने का तरीका है।”

बेताल ने प्रश्न किया, “विक्रम, तू क्या सोचता है, इस मगरमच्छ का कोई उपयोग हो सकता है?”

विक्रमादित्य ने विचार किया और कहा, “हाँ, इसकी चालाकी से हमें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया जा सकता है। विज्ञान और तकनीक में हमेशा सोच की चालाकी का उपयोग किया जाता है।”

बेताल खुश होकर बोला, “तूने सही कहा, विक्रम। हमें अपनी बुद्धिमानी का उपयोग करके अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए।”

इस कथा से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन में चालाकी का उपयोग करके अपने लक्ष्य की प्राप्ति करनी चाहिए। चालाकी और बुद्धिमानी का संयोग हमें सफलता की ओर ले जा सकता है।

एक समय की बात है, विक्रमादित्य और बेताल की कथाएँ लोकप्रिय थीं। एक दिन, विक्रमादित्य को बेताल द्वारा एक रहस्यमय गुफा ले जाने का काम मिला। बेताल ने उसे चेतावनी दी कि गुफा बहुत ही भयानक है और उसमें एक मगरमच्छ (क्रोकोडाइल) रहता है जो किसी के साथ धोखा कर सकता है। विक्रमादित्य, निर्भय और साहसी होते हुए भी, चुनौती स्वीकार कर लेते हैं और उस गुफा की ओर अग्रसर होते हैं।

जब विक्रमादित्य गुफा के अंदर पहुंचते हैं, तो वे वास्तविकता में एक भयानक और डरावनी स्थिति से घिरे हुए होते हैं। वे अगले कमरे में जाते हैं जहां एक बड़ा मगरमच्छ बैठा है। मगरमच्छ बेहद चालाक है और विक्रमादित्य को चाहता है कि वह उसे बाहर निकाल दे ताकि वह उसे भी एक बड़ा मजाक बना सके।

मगरमच्छ कहता है, “अरे राजा विक्रमादित्य, मुझे बहुत भूख लगी है। अगर तुम मुझे अपने खाद्य के कुछ हिस्से दोगे, तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ।”

विक्रमादित्य ध्यान से सोचते हैं। वे जानते हैं कि एक मगरमच्छ के साथ दोस्ती करना बहुत खतरनाक हो सकता है, लेकिन वे भी जानते हैं कि धोखा देना और छल करने के लिए मगरमच्छ का दिमाग बहुत तेज होता है। उनकी समझ में आता है कि यदि वे मगरमच्छ को सामर्थ्य का परीक्षण करेंगे, तो वे उसे चालाकी से हरा सकते हैं।

विक्रमादित्य मगरमच्छ के प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं और उसे अपने खाद्य के कुछ हिस्से देते हैं। मगरमच्छ खाने लगता है और बाद में विक्रमादित्य से पूछता है, “तो राजा विक्रमादित्य, अब बताओ, मैं तुम्हारी मदद कैसे कर सकता हूँ?”

विक्रमादित्य खुश होते हुए कहते हैं, “मगरमच्छ, मैं तुमसे एक प्रश्न पूछूंगा। यदि तुम मेरी मदद करने के बजाय मुझे धोखा देते हो, तो मैं तुम्हारे बारे में क्या करूंगा?”

मगरमच्छ सोचने लगता है। वह बहुत चालाक है, लेकिन विक्रमादित्य की विवेकपूर्ण बात समझता है। वह कहता है, “राजा विक्रमादित्य, आप मुझपर विश्वास कर सकते हैं। मैं आपकी सेवा में हमेशा रहने के लिए तैयार हूँ।”

विक्रमादित्य खुशी से भर जाते हैं और मगरमच्छ को धन्यवाद कहते हैं। उनकी मित्रता एक सच्चे और निष्ठावान संबंध का प्रतीक है, जिसमें विश्वास और आपसी समझ होती है।

इस कथा से हमें यह सिख मिलती है कि चालाकी और माया के प्रति सतर्क रहना आवश्यक है। हमें लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए निश्चित रूप से उनके वचनों को जांचने और सच्चाई की पहचान करने की क्षमता होनी चाहिए।

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