Kahani Ka Jadu Blog विक्रम बेताल की कहानी: चुपचाप मंदिर में जाओ

विक्रम बेताल की कहानी: चुपचाप मंदिर में जाओ

चुपचाप मंदिर में जाओ

एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में विक्रम बेताल की एक रहस्यमयी कथा घटित हुई। इस कथा का नाम था “चुपचाप मंदिर में जाओ”.

गांव के लोगों में एक विश्वास था कि गांव के पास ही एक पुराना मंदिर है जिसमें भगवान का मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर अत्यंत पवित्र माना जाता था और उसे संतों द्वारा संभाला जाता था। लेकिन कोई भी व्यक्ति अब तक उस मंदिर में अनदेखी के कारण नहीं गया था। इसके पीछे एक रहस्य था जिसे लोग डर के कारण सुलझाने से पीछे हट गए।

एक दिन, विक्रमादित्य को इस मंदिर के बारे में सुनकर अद्भुतता महसूस हुई। उन्होंने फैसला किया कि वह मंदिर में जाएंगे और उस रहस्य को समझने की कोशिश करेंगे। उन्होंने बेताल को अपने साथ लिया, जिससे उन्हें रहस्यों के समाधान में मदद मिल सके।

जब विक्रम और बेताल ने मंदिर के द्वार पर पहुँचा, तो वे देखा कि द्वार पर एक चिट्ठी छोड़ी गई है। चिट्ठी में लिखा था, “जो इस मंदिर में जाता है, वह अपने बात बताए बिना वहां से वापस नहीं आ सकता।” विक्रमादित्य और बेताल ने यह सोचकर कि उन्हें इस रहस्यमयी मंदिर के अंदर जाना है, साहस जुटाया और द्वार को खोला।

जब वे मंदिर के अंदर पहुंचे, तो वे हैरान रह गए। मंदिर के अंदर अत्यंत शांतिपूर्ण और प्रकाशमय वातावरण था। जब वे आगे बढ़े, तो उन्हें बहुत सारे मंदिर मूर्तियां दिखाई दीं, परंपरागत धुन बज रही थी और धूप छत से अद्भुत ढंग से आ रही थी। वे अद्भुत नजारे देखकर हैरान हो गए।

विक्रमादित्य और बेताल ने धीरे-धीरे मंदिर के भीतर घूमना शुरू किया। जब वे अंदर बढ़ते गए, तो उन्हें एक विशेष कक्ष में आवाज सुनाई दी। वे वहां पहुंचे और देखा कि एक सिंहासन पर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति के पास एक आरती की थाली थी और विक्रम बेताल को देखकर वह थाली उठा ली गई।

मूर्ति ने कहा, “विक्रमादित्य, यदि तुम मेरी आरती को पूरा करोगे, तो मैं तुम्हें एक बड़ा रहस्य बताऊंगा।” विक्रमादित्य और बेताल ने समझदारी से आरती की पूरी की और भगवान विष्णु ने उन्हें रहस्यमय जीवन की बातें बताईं।

यह जीवन बदल देने वाली रहस्यमयी कथा विक्रम और बेताल को बहुत प्रभावित करती थी। इसे सुनकर वे ज्ञान और सत्य की महत्वपूर्णता को समझते थे और इसे अपने जीवन में अपनाने का निर्णय लेते थे। इस कथा से हमें यह सिखाया जाता है कि हमें चुपचाप मंदिर में जाने का साहस रखना चाहिए, क्योंकि वहां हमें जीवन के अनमोल रहस्यों का पता चल सकता है।

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