Kahani Ka Jadu Blog विक्रम बेताल की कहानी: अमर जीवन की प्राप्ति

विक्रम बेताल की कहानी: अमर जीवन की प्राप्ति

अमर जीवन की प्राप्ति

एक बार की बात है, विक्रमादित्य और बेताल के बीच एक नई कथा शुरू होती है। बेताल विक्रमादित्य के पास आते हैं और कहते हैं, “विक्रमादित्य, मैं तुम्हें एक कथा सुनाना चाहता हूँ, जो अमर जीवन की प्राप्ति के बारे में है। क्या तुम उसे सुनने के लिए तैयार हो?”

विक्रमादित्य, जो हमेशा से नयी कथाओं के प्रति आकर्षित होते रहते हैं, हाँ कहते हैं। और उनकी कथा शुरू होती है।

एक गहरे जंगल में, एक आदिवासी गाँव में एक प्राचीन मंदिर होता है। यह मंदिर अमर जीवन के रहस्य से भरा हुआ है। जब कोई व्यक्ति इस मंदिर में अपनी मरती हुई प्राणी की मूर्ति को स्पर्श करता है, तो वह अमरत्व प्राप्त करता है और अनंत जीवन का आनंद उठाता है।

एक दिन, गाँव का एक युवक, नाम सुरेश, इस रहस्यमय मंदिर के बारे में सुनता है। उसे अमरत्व की इच्छा होती है और वह मंदिर में जाता है। वह देखता है कि मंदिर के द्वार पर एक प्राचीन पुरानी की तह सजी हुई है। उसे ज्ञात होता है कि यह पुरानी तह उसे मंदिर के अंदर ले जाने के लिए उपयोगी हो सकती है।

सुरेश ने धीरे से तह को उठाया और मंदिर के अंदर प्रवेश किया। वह एक अन्तरिक्ष में आदर्श जीवन की स्थिति में पहुंचता है। सभी लोग अमर हैं और सदैव खुश रहते हैं।

सुरेश भी खुशी के आंदोलन के साथ जीने लगता है। उसका समय बितने लगता है और उसे अपने प्राचीन जीवन के बारे में याद आता है। उसे अपनी परिवार की याद आती है और उसे एक आदमी के बारे में चिंता होती है जिसने उसकी गर्लफ्रेंड को धोखा दिया था।

सुरेश को एक बात समझ में आती है कि अमर जीवन की प्राप्ति सबके लिए समर्थन करने के बजाय, उसे अपने असली जीवन में लौटना चाहिए। वह मंदिर से बाहर निकलता है और अपनी जिम्मेदारियों का सामना करने के लिए तत्पर हो जाता है।

विक्रमादित्य कहते हैं, “इस कथा से हमें यह सिख मिलती है कि हमें अपने असली जीवन की मूल्यांकन करना चाहिए और न तो किसी रहस्यमय अमरत्व के पीछे दौड़ना चाहिए। हमें अपने संघर्षों से सीख लेना चाहिए और अपने असली जीवन को महत्व देना चाहिए।” इस प्रकार, विक्रम बेताल की इस रहस्यमयी कथा से हमें यह सिख मिलती है कि असली अमरत्व हमारी संघर्षों, परिश्रम और समर्पण में होता है।

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