Kahani Ka Jadu Blog तितलियों की उड़ान

तितलियों की उड़ान

तितलियों की उड़ान

बगीचे के पुष्पों की महक और ताजगी हमेशा से ही तितलियों को खींचती रही थी। प्रकृति की सुन्दरता को देखने का आनंद तो उन्हें भी था, लेकिन इन सुंदर पुष्पों के बीच उड़ती हुई तितलियों को देखकर उनका मन बहुत खुश होता था। वे अपनी रंगीन पंखों की खूबसूरती से हमेशा लोगों के दिलों को चुराती थीं।

एक दिन, एक छोटे से गांव के नन्हे-मुन्ने बच्चे ने बगीचे के समीप खेलते हुए एक खूबसूरत तितली को देखा। उसके चमकते हुए पंखों को देखकर वह बच्चा बहुत खुश हुआ। तितली उड़कर आसमान में गायब हो गई, और फिर उसने फूलों के पास उड़ने का सोचा। परंतु, उसके छोटे पंखों की वजह से वह उड़ नहीं पाई।

बच्चे ने देखा कि तितली कितनी चाहकर भी उड़ने के लिए असमर्थ थी। तब उसने एक रंगीन पतंग बनाने का निर्णय लिया। वह पतंग के लिए खारीदी गई थी, और उसने उसे ऊंची जगह पर चढ़ा दिया।

फिर वह उस तितली के पास गया और कहा, “तितली दीदी, मुझे तुम्हारे जैसा होने की बहुत ख्वाहिश है, परंतु मेरे पंखों की वजह से मैं उड़ नहीं सकता। क्या तुम मुझे उड़ाने में मदद कर सकती हो?”

तितली दीदी बच्चे की इच्छा को समझ गई। उसने कहा, “बेटा, मैं तुम्हें उड़ाने में मदद करूंगी। लेकिन याद रखना, तुम पंखों की वजह से अद्यापि उड़ नहीं सकोगे। इसलिए, इस पतंग को देखकर ही उड़ान का आनंद लेना।”

बच्चा ने उसके कथितानुसार किया और पतंग को देखकर खुश हो गया। वह उच्चाहार में उड़ा और आसमान में बदल गया। वह आनंद का आलमगीर हो गया, जब तक कि धीरे-धीरे पतंग की रस्सी टूट गई और वह धरती की ओर लौट आया।

तब बच्चा ने उसे पुकारा, “तितली दीदी, आपकी मदद के बिना मैं फिर से उड़ नहीं सकता। लेकिन आपने मुझे एक अनुभव दिया है जो मैं कभी नहीं भूल सकूँगा। आपने मुझे यह सिखाया कि सच्ची खुशी अपनी स्थिति से नहीं, अपनी सोच से आती है।”

तितली दीदी बच्चे की बातों को समझ गई और उसे आदर्श उदाहरण के रूप में रखा। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें खुशी और संतोष अपनी स्थिति और परिस्थितियों से नहीं, अपनी आंतरिक शांति और समृद्धि के अंदर से मिलती है।

इस प्रकार, बच्चे ने तितलियों के साथ उड़ान भरी और वे सबको यह सिखाया कि सपने पूरे करने के लिए हमें अपनी सोच और कार्यों में विश्वास रखना चाहिए।

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